श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 13: ध्रुव महाराज के वंशजों का वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.13.14 
प्रदोषो निशिथो व्युष्ट इति दोषासुतास्त्रय: ।
व्युष्ट: सुतं पुष्करिण्यां सर्वतेजसमादधे ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
दोषा के तीन बेटे थे - प्रदोष, निशिथ और व्युष्ट। व्युष्ट की पत्नी का नाम पुष्करिणी था, जिसने सर्वतेजा नामक एक बहुत शक्तिशाली पुत्र को जन्म दिया।
 
दोषा के तीन बेटे थे - प्रदोष, निशिथ और व्युष्ट। व्युष्ट की पत्नी का नाम पुष्करिणी था, जिसने सर्वतेजा नामक एक बहुत शक्तिशाली पुत्र को जन्म दिया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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