इस प्रकार पूर्ण कृष्णभावनाभावित इत्र २४ वर्ष तक कठोर तपस्या करने के बाद महाराज उत्तानपाद के अति सम्माननीय पुत्र ध्रुव महाराज ने तीनों लोकों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया।
Thus Dhruva Maharaja, the most honorable son of Maharaja Uttānapāda, fully Kṛṣṇa conscious, attained the highest position in the three worlds.
तात्पर्य
कृष्ण चेतना के लिए सटीक संस्कृत शब्दावली का यहाँ उल्लेख किया गया है: कृष्ण-परयाणः। परयाण का अर्थ है "आगे बढ़ना।" जो कोई भी कृष्ण के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है उसे कृष्ण-परयाण या पूर्ण रूप से कृष्ण चेतन कहा जाता है। ध्रुव महाराज का उदाहरण बताता है कि हर कृष्ण चेतन व्यक्ति ब्रह्मांड के भीतर तीनों ग्रह प्रणालियों के सर्वोच्च शिखर तक पहुँचने की उम्मीद कर सकता है। कृष्ण चेतन व्यक्ति किसी भी महत्वाकांक्षी भौतिकवादी की कल्पना से परे एक ऊँचा स्थान प्राप्त कर सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥