भागवत साहित्य में ऐसे ही कई अन्य उदाहरण हैं। यह कहा गया है कि जब कर्दम मुनि ने अपनी पत्नी देवहूति को पूरे ब्रह्मांड में ले जाने के लिए एक हवाई जहाज बनाया, तो हवाई जहाज एक बड़े शहर की तरह था, जिसमें कई घर, झीलें और उद्यान थे। आधुनिक वैज्ञानिकों ने बड़े हवाई जहाज बनाए हैं, लेकिन वे यात्रियों से भरे हुए हैं, जिन्हें उनमें सवारी करने के दौरान हर तरह की असुविधाओं का अनुभव होता है।
भौतिक वैज्ञानिक भौतिक हवाई जहाज के निर्माण में भी परिपूर्ण नहीं हैं। कर्दम द्वारा इस्तेमाल किए गए विमान या विष्णुलोक से भेजे गए विमान की तुलना करने के लिए, उन्हें एक बड़े शहर की तरह सुसज्जित हवाई जहाज का निर्माण करना होगा, जिसमें जीवन की सभी सुख-सुविधाएँ हों - झीलें, उद्यान, पार्क आदि। उनका विमान बाहरी अंतरिक्ष में उड़ने और मंडराने और अन्य सभी ग्रहों की यात्रा करने में सक्षम होना चाहिए। यदि वे ऐसा कोई विमान बनाते हैं, तो उन्हें बाहरी अंतरिक्ष में यात्रा करने के लिए ईंधन के लिए अलग-अलग अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की ज़रूरत नहीं होगी। ऐसे विमान में असीमित ईंधन की आपूर्ति होगी, या, विष्णुलोक के विमान की तरह, इसके बिना उड़ जाएगा।
