श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 12: ध्रुव महाराज का भगवान् के पास जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.12.3 
न भवानवधीद्यक्षान्न यक्षा भ्रातरं तव ।
काल एव हि भूतानां प्रभुरप्ययभावयो: ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
वास्तव में न तो तुमने यक्षों को मारा है और न ही उन्होंने तुम्हारे भाई को मारा है क्योंकि सृजन और विनाश का असली कारण परमेश्वर का शाश्वत स्वरूप काल ही है।
 
वास्तव में न तो तुमने यक्षों को मारा है और न ही उन्होंने तुम्हारे भाई को मारा है क्योंकि सृजन और विनाश का असली कारण परमेश्वर का शाश्वत स्वरूप काल ही है।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas