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श्लोक 4.12.3  |
न भवानवधीद्यक्षान्न यक्षा भ्रातरं तव ।
काल एव हि भूतानां प्रभुरप्ययभावयो: ॥ ३ ॥ |
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| अनुवाद |
| वास्तव में न तो तुमने यक्षों को मारा है और न ही उन्होंने तुम्हारे भाई को मारा है क्योंकि सृजन और विनाश का असली कारण परमेश्वर का शाश्वत स्वरूप काल ही है। |
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| वास्तव में न तो तुमने यक्षों को मारा है और न ही उन्होंने तुम्हारे भाई को मारा है क्योंकि सृजन और विनाश का असली कारण परमेश्वर का शाश्वत स्वरूप काल ही है। |
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