श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 12: ध्रुव महाराज का भगवान् के पास जाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.12.29 
परीत्याभ्यर्च्य धिष्ण्याग्र्यं पार्षदावभिवन्द्य च ।
इयेष तदधिष्ठातुं बिभ्रद्रूपं हिरण्मयम् ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
ध्रुव महाराज ने चढ़ने से पहले विमान की पूजा की, उसकी परिक्रमा की और विष्णु के साथियों को भी प्रणाम किया। इसी दौरान वे पिघले हुए सोने की तरह चमकने लगे और रोशन हो उठे। इस प्रकार वे उस दिव्य विमान में चढ़ने के लिए पूरी तरह से तैयार थे।
 
ध्रुव महाराज ने चढ़ने से पहले विमान की पूजा की, उसकी परिक्रमा की और विष्णु के साथियों को भी प्रणाम किया। इसी दौरान वे पिघले हुए सोने की तरह चमकने लगे और रोशन हो उठे। इस प्रकार वे उस दिव्य विमान में चढ़ने के लिए पूरी तरह से तैयार थे।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas