श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 12: ध्रुव महाराज का भगवान् के पास जाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.12.27 
एतद्विमानप्रवरमुत्तमश्लोकमौलिना ।
उपस्थापितमायुष्मन्नधिरोढुं त्वमर्हसि ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
हे लंबी आयु वाले, यह अनूठा विमान उस भगवान ने भेजा है, जिनकी स्तुति चुनिंदा मंत्रों द्वारा की जाती है और जो सभी जीवों के प्रमुख हैं। आप इस तरह के विमान में चढ़ने के सर्वथा पात्र हैं।
 
हे लंबी आयु वाले, यह अनूठा विमान उस भगवान ने भेजा है, जिनकी स्तुति चुनिंदा मंत्रों द्वारा की जाती है और जो सभी जीवों के प्रमुख हैं। आप इस तरह के विमान में चढ़ने के सर्वथा पात्र हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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