श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 12: ध्रुव महाराज का भगवान् के पास जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.12.24 
तस्याखिलजगद्धातुरावां देवस्य शार्ङ्गिण: ।
पार्षदाविह सम्प्राप्तौ नेतुं त्वां भगवत्पदम् ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
हम परम पुरुष भगवान के दूत हैं, जिन्होंने पूरे ब्रह्मांड का निर्माण किया और जिनके हाथ में शार्ङ्ग नामक धनुष है। हमें आपको वैकुण्ठलोक ले जाने के लिए विशेष रूप से नियुक्त किया गया है।
 
We are the representatives of the Lord, who is the creator of the entire universe and holds the bow called Sharṅga in His hands. We have been specially appointed to take you to Vaikunṭhaloka.
तात्पर्य
भगवत् गीता में भी भगवान कहते हैं कि कहीं भी उनकी अद्भुत लीलाओं को जानने से (भौतिक जगत या आध्यात्मिक जगत) जो कोई सही में समझता है कि वह कौन हैं, कैसे दिखाई देते हैं और कैसे कार्य करते हैं, वह आध्यात्मिक जगत को प्राप्त करने के योग्य हो जाता है। भगवद् गीता में कहे गए इस सिद्धांत को महाराज ध्रुव के मामले में लागू किया गया था। अपने पूरे जीवन भर उन्होंने कठोर तपस्या और उपवास के जरिए भगवान को समझने की कोशिश की। अब, परिणाम यह निकला कि ध्रुव महाराज भगवान के अपने आदरणीय सहकर्मियों के साथ आध्यात्मिक जगत में ऊपर उठाने योग्य हो गए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)