यह देखकर कि ये असाधारण पुरुष भगवान के प्रत्यक्ष सेवक हैं, ध्रुव महाराज तुरंत उठ खड़े हुए। किन्तु हड़बड़ाहट में जल्दी के कारण वे उचित रीति से उनका स्वागत करना भूल गए। अतः उन्होंने हाथ जोड़कर केवल नमस्कार किया और प्रभु के पवित्र नामों की महिमा का जप करने लगे।
Seeing that these extraordinary persons were direct servants of the Lord, Dhruva Maharaja immediately stood up. But in his haste he forgot to welcome them properly. So he simply folded his hands and offered his obeisances and began chanting the glories of the Lord's holy names.
तात्पर्य
भगवान के पवित्र नाम जप हर तरह से परिपूर्ण हैं। जब ध्रुव महाराज ने भगवान विष्णु के परम सहयोगी, चार हाथ वाले और मनोहर ढंग से सज्जित विष्णुदूतों को देखा, तो वे समझ गए कि वे कौन हैं, लेकिन कुछ पलों के लिए वे चकरा गए। लेकिन, प्रभु के पवित्र नाम, हरे कृष्ण मंत्र का जप करके ही वे उन असामान्य अतिथियों को संतुष्ट कर पाए जो अचानक उनके सामने प्रकट हुए थे। प्रभु के पवित्र नाम का जप परिपूर्ण है; भले ही कोई प्रभु विष्णु या उनके सहयोगियों को प्रसन्न करने का तरीका न जानता हो, लेकिन प्रभु के पवित्र नाम का निष्ठापूर्वक जप करने से ही सब कुछ परिपूर्ण हो जाता है। इसलिए, संकट या सुख में भी एक भक्त लगातार हरे कृष्ण मंत्र का जप करता है। जब वह संकट में होता है तो उसे तुरंत राहत मिलती है, और जब वह प्रभु विष्णु या उनके सहयोगियों को प्रत्यक्ष रूप से देखने की स्थिति में होता है, तो इस महामंत्र का जप करके वह भगवान को प्रसन्न कर सकता है। यह महामंत्र का निरपेक्ष स्वरूप है। चाहे संकट हो या सुख, इसका जप असीमित रूप से किया जा सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥