श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 12: ध्रुव महाराज का भगवान् के पास जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.12.19 
स ददर्श विमानाग्र्यं नभसोऽवतरद् ध्रुव: ।
विभ्राजयद्दश दिशो राकापतिमिवोदितम् ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही उनकी मुक्ति के लक्षण दिखाई दिए, उन्होंने देखा कि एक बेहद खूबसूरत हवाई जहाज आसमान से उतर रहा था, मानो चमकता हुआ चाँद दसों दिशाओं को रोशन करते हुए नीचे आ रहा हो।
 
जैसे ही उनकी मुक्ति के लक्षण दिखाई दिए, उन्होंने देखा कि एक बेहद खूबसूरत हवाई जहाज आसमान से उतर रहा था, मानो चमकता हुआ चाँद दसों दिशाओं को रोशन करते हुए नीचे आ रहा हो।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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