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श्लोक 4.12.14  |
एवं बहुसवं कालं महात्माविचलेन्द्रिय: ।
त्रिवर्गौपयिकं नीत्वा पुत्रायादान्नृपासनम् ॥ १४ ॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार आत्मसंयमी महापुरुष ध्रुव महाराज ने धर्म, अर्थ और काम इन तीन प्रकार की सांसारिक गतिविधियों को अच्छे से निभाते हुए अनेक वर्षों तक राज्य किया। इसके बाद उन्होंने राज्य का भार अपने पुत्र को सौंप दिया। |
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| इस प्रकार आत्मसंयमी महापुरुष ध्रुव महाराज ने धर्म, अर्थ और काम इन तीन प्रकार की सांसारिक गतिविधियों को अच्छे से निभाते हुए अनेक वर्षों तक राज्य किया। इसके बाद उन्होंने राज्य का भार अपने पुत्र को सौंप दिया। |
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