श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 11: युद्ध बन्द करने के लिए  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.11.6 
तान् हन्यमानानभिवीक्ष्य गुह्यका-
ननागसश्चित्ररथेन भूरिश: ।
औत्तानपादिं कृपया पितामहो
मनुर्जगादोपगत: सहर्षिभि: ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
जब स्वायंभुव मनु ने देखा कि उनका पौत्र ध्रुव उन यक्षों का वध कर रहा है जिन्होंने कोई अपराध नहीं किया था, तो वे अपनी दया से ऋषियों को साथ लेकर ध्रुव के पास गये और उसे उपदेश दिया।
 
जब स्वायंभुव मनु ने देखा कि उनका पौत्र ध्रुव उन यक्षों का वध कर रहा है जिन्होंने कोई अपराध नहीं किया था, तो वे अपनी दया से ऋषियों को साथ लेकर ध्रुव के पास गये और उसे उपदेश दिया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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