एक उदाहरण से हमें परम भगवान की अकल्पनीय शक्ति को समझने में सहायता मिल सकती है। युद्ध के हालिया इतिहास में परम व्यक्तित्व भगवान ने हिटलर और उसे पहले नेपोलियन बोनापार्ट की रचना की और वे दोनों युद्धों में कई सजीव प्राणियों की हत्या की। पर अंत में बोनापार्ट और हिटलर भी मारे गए। लोग आज भी हिटलर और बोनापार्ट के बारे में किताबें पढ़ने और लिखने में बहुत दिलचस्पी रखते हैं और कैसे उन्होंने युद्धों में इतने लोगों की हत्या की। हर साल हजारों यहूदियों को कारावास में हिटलर द्वारा मारे जाने के बारे में जनता के पढ़ने के लिए कई किताबें प्रकाशित की जाती हैं। पर कोई यह अन्वेषण नहीं करता कि हिटलर को किसने मारा और इंसानों के इतने बड़े हत्यारे की रचना किसने की। भक्तों की ज्यादा दिलचस्पी संसार के अस्थिर इतिहास का अध्ययन करने में नहीं है। उनकी दिलचस्पी केवल उसमें है जो मूल सृजनकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता है। कृष्ण चेतना आंदोलन का उद्देश्य यही है।
