श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 11: युद्ध बन्द करने के लिए  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.11.1 
मैत्रेय उवाच
निशम्य गदतामेवमृषीणां धनुषि ध्रुव: ।
सन्दधेऽस्त्रमुपस्पृश्य यन्नारायणनिर्मितम् ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
श्री मैत्रेय ने कहा: हे विदुर, जब ध्रुव महाराज ने ऋषियों के उत्साहवर्धक शब्द सुने तो उन्होंने जल से आचमन किया और भगवान नारायण द्वारा निर्मित बाण लेकर उसे अपने धनुष पर स्थापित किया।
 
श्री मैत्रेय ने कहा: हे विदुर, जब ध्रुव महाराज ने ऋषियों के उत्साहवर्धक शब्द सुने तो उन्होंने जल से आचमन किया और भगवान नारायण द्वारा निर्मित बाण लेकर उसे अपने धनुष पर स्थापित किया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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