श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 10: यक्षों के साथ ध्रुव महाराज का युद्ध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.10.7 
ततो निष्क्रम्य बलिन उपदेवमहाभटा: ।
असहन्तस्तन्निनादमभिपेतुरुदायुधा: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
हे वीर विदुर, ध्रुव महाराज के शंख की कर्कश ध्वनि को सहन न कर सकने के कारण यक्षों के परम शक्तिशाली वीर अपने अस्त्र-शस्त्र लेकर अपनी नगरी से बाहर निकले और उन्होंने ध्रुव पर आक्रमण किया।
 
O heroic Vidura, unable to endure the resounding sound of Dhruva Maharaja's conch, the mighty soldiers of the Yakṣas came out of their city with their weapons and attacked Dhruva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)