श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 10: यक्षों के साथ ध्रुव महाराज का युद्ध  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.10.29 
ध्रुवे प्रयुक्तामसुरैस्तां मायामतिदुस्तराम् ।
निशम्य तस्य मुनय: शमाशंसन् समागता: ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
जब मुनियों ने सुना कि ध्रुव महाराज असुरों की मायावी चालों के आगे झुक गए हैं, तो उन्होंने उनके मंगल की कामना के लिए तुरंत इकट्ठा होना शुरू कर दिया।
 
When the sages heard that Dhruva Maharaja had been defeated by the magical tricks of the demons, they immediately gathered there to wish him well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)