vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् भागवतम
»
स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति
»
अध्याय 10: यक्षों के साथ ध्रुव महाराज का युद्ध
»
श्लोक 29
श्लोक
4.10.29
ध्रुवे प्रयुक्तामसुरैस्तां मायामतिदुस्तराम् ।
निशम्य तस्य मुनय: शमाशंसन् समागता: ॥ २९ ॥
अनुवाद
जब मुनियों ने सुना कि ध्रुव महाराज असुरों की मायावी चालों के आगे झुक गए हैं, तो उन्होंने उनके मंगल की कामना के लिए तुरंत इकट्ठा होना शुरू कर दिया।
When the sages heard that Dhruva Maharaja had been defeated by the magical tricks of the demons, they immediately gathered there to wish him well.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×