श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 10: यक्षों के साथ ध्रुव महाराज का युद्ध  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.10.13 
औत्तानपादि: स तदा शस्त्रवर्षेण भूरिणा ।
न एवाद‍ृश्यताच्छन्न आसारेण यथा गिरि: ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
ध्रुव महाराज को हथियारों ने इस तरह से ढँक लिया कि वे एक पर्वत की तरह लगने लगे जैसे कोई पर्वत बारिश के पानी से ढँक गया हो।
 
ध्रुव महाराज को हथियारों ने इस तरह से ढँक लिया कि वे एक पर्वत की तरह लगने लगे जैसे कोई पर्वत बारिश के पानी से ढँक गया हो।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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