Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.1.49-52: दक्ष ने शेष दो कन्याओं में से एक को पितृलोक में दान कर दिया जहाँ वह प्रेमपूर्वक रह रही है और दूसरी कन्या शिव जी को दान कर दी जो सभी पापियों के उद्धारक और भव बंधन से मुक्ति दिलाने वाले हैं। दक्ष ने जिन्हें तेरह कन्याओं को धर्म को दिया उनके नाम श्रद्धा, मैत्री, दया, शांति, तुष्टि, पुष्टि, क्रिया, उन्नति, बुद्धि, मेधा, तितिक्षा, ह्री और मूर्ति थे। इन तेरह कन्याओं ने पुत्रों को जन्म दिया, जिनमें से श्रद्धा ने शुभ को जन्म दिया, मैत्री ने प्रसाद को, दया ने अभय को, शांति ने सुख को, तुष्टि ने मुद को, पुष्टि ने स्मय को, क्रिया ने योग को, उन्नति ने दर्प को, बुद्धि ने अर्थ को, मेधा ने स्मृति को, तितिक्षा ने क्षेम को और ह्री ने प्रश्रय को जन्म दिया। समस्त गुणों की खान मूर्ति ने नर-नारायण को जन्म दिया, जो पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान हैं। | bhagavat अध्याय 4.1: मनु की पुत्रियों की वंशावली । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दक्ष ने शेष दो कन्याओं में से एक को पितृलोक में दान कर दिया जहाँ वह प्रेमपूर्वक रह रही है और दूसरी कन्या शिव जी को दान कर दी जो सभी पापियों के उद्धारक और भव बंधन से मुक्ति दिलाने वाले हैं। दक्ष ने जिन्हें तेरह कन्याओं को धर्म को दिया उनके नाम श्रद्धा, मैत्री, दया, शांति, तुष्टि, पुष्टि, क्रिया, उन्नति, बुद्धि, मेधा, तितिक्षा, ह्री और मूर्ति थे। इन तेरह कन्याओं ने पुत्रों को जन्म दिया, जिनमें से श्रद्धा ने शुभ को जन्म दिया, मैत्री ने प्रसाद को, दया ने अभय को, शांति ने सुख को, तुष्टि ने मुद को, पुष्टि ने स्मय को, क्रिया ने योग को, उन्नति ने दर्प को, बुद्धि ने अर्थ को, मेधा ने स्मृति को, तितिक्षा ने क्षेम को और ह्री ने प्रश्रय को जन्म दिया। समस्त गुणों की खान मूर्ति ने नर-नारायण को जन्म दिया, जो पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान हैं।
Of the remaining two daughters, one was donated to Pitrloka, where she is living lovingly and the other daughter was given to Shiva, the savior of all sinners from the bondage of life. The thirteen daughters that Daksha gave to Dharma were named: Shraddha, Maitri, Daya, Shanti, Tushti, Pushti, Kriya, Unnati, Buddhi, Medha, Titiksha, Hree and Murti. These thirteen gave birth to sons, which are as follows - Shraddha gave Shubh, Maitri gave Prasad, Daya gave Abhay, Shanti gave Sukh, Tushti gave Mud, Pushti gave Samaya, Kriya gave Yoga, Unnati gave Darpa, Buddhi gave Artha, Medha gave Smriti, Titiksha gave Kshema and Hree gave birth to Prashraya. Murti, the mine of all virtues, gave birth to Nar-Narayana, who is the perfect Purushottam God.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥