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bhagavat 4.1.46-47: हे विदुर, इस प्रकार इन ऋषियों और कर्दम की पुत्रियों के वंशजों से संसार की आबादी बढ़ गई। जो कोई भी इस वंश के वर्णन को श्रद्धा के साथ सुनता है, वह सभी पाप प्रतिक्रियाओं से मुक्त हो जाता है। मनु की एक और बेटी का नाम प्रसूति था, उसने ब्रह्मा के पुत्र दक्ष से शादी की।   |   bhagavat अध्याय 4.1: मनु की पुत्रियों की वंशावली   ।   bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 1: मनु की पुत्रियों की वंशावली  »  श्लोक 46-47
 
 
श्लोक  4.1.46-47 
त एते मुनय: क्षत्तर्लोकान्सर्गैरभावयन् ।
एष कर्दमदौहित्रसन्तान: कथितस्तव ॥ ४६ ॥
श‍ृण्वत: श्रद्दधानस्य सद्य: पापहर: पर: ।
प्रसूतिं मानवीं दक्ष उपयेमे ह्यजात्मज: ॥ ४७ ॥
 
 
अनुवाद
हे विदुर, इस प्रकार इन ऋषियों और कर्दम की पुत्रियों के वंशजों से संसार की आबादी बढ़ गई। जो कोई भी इस वंश के वर्णन को श्रद्धा के साथ सुनता है, वह सभी पाप प्रतिक्रियाओं से मुक्त हो जाता है। मनु की एक और बेटी का नाम प्रसूति था, उसने ब्रह्मा के पुत्र दक्ष से शादी की।
 
O Vidura, thus the population of the world increased through the progeny of these sages and the daughters of Kardama. Whoever listens with devotion to the tales of this dynasty is released from all bondages of sin. Of the other daughters of Manu, Prasuti married Daksha, the son of Brahma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)