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bhagavat 4.1.29: मैत्रेय महामुनि ने कहा: अत्रि मुनि को इस प्रकार बोलते हुए सुनकर तीनों महान देवता मुस्कुराए और उन्होंने मधुर वाणी में निम्नलिखित उत्तर दिया।   |   bhagavat अध्याय 4.1: मनु की पुत्रियों की वंशावली   ।   bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 1: मनु की पुत्रियों की वंशावली  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.1.29 
मैत्रेय उवाच
इति तस्य वच: श्रुत्वा त्रयस्ते विबुधर्षभा: ।
प्रत्याहु: श्लक्ष्णया वाचा प्रहस्य तमृषिं प्रभो ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
मैत्रेय महामुनि ने कहा: अत्रि मुनि को इस प्रकार बोलते हुए सुनकर तीनों महान देवता मुस्कुराए और उन्होंने मधुर वाणी में निम्नलिखित उत्तर दिया।
 
Maitreya Maha-muni said: Hearing Atri Muni speaking thus, the three great gods smiled and replied in soft voice as follows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)