Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.1.23: मुनि एक टांग पर खड़े थे, लेकिन जैसे उन्होंने देखा कि तीन देवता उनके सामने आ गए हैं, तो वे सबको एक साथ देखकर इतने प्रसन्न हो गए कि उन्होंने बहुत मुश्किल होते हुए भी एक ही टांग से उनके पास पहुँचना उचित समझा। | bhagavat अध्याय 4.1: मनु की पुत्रियों की वंशावली । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्प्रादुर्भावसंयोगविद्योतितमना मुनि: ।
उत्तिष्ठन्नेकपादेन ददर्श विबुधर्षभान् ॥ २३ ॥
अनुवाद
मुनि एक टांग पर खड़े थे, लेकिन जैसे उन्होंने देखा कि तीन देवता उनके सामने आ गए हैं, तो वे सबको एक साथ देखकर इतने प्रसन्न हो गए कि उन्होंने बहुत मुश्किल होते हुए भी एक ही टांग से उनके पास पहुँचना उचित समझा।
The sage was standing on one leg, but as soon as he saw the three Gods appear before him, he was so happy to see them that despite the great pain, he approached them on one leg.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥