आकूति के दो भाई थे, लेकिन उनके बावजूद, राजा स्वायंभुव मनु ने प्रजापति रुचि से उसकी शादी इस शर्त पर की थी कि उससे जो पुत्र पैदा होगा वह मनु को पुत्र के रूप में लौटा दिया जाएगा। उन्होंने ऐसा अपनी पत्नी शतरूपा से परामर्श करके किया था।
Akūti had two brothers, yet King Svayambhuva Manu married her to Prajapati Ruchi on the condition that any son born to her would be returned to Manu as a son. He did this in consultation with his wife Shatarūpā.
तात्पर्य
कभी कोई पुत्रहीन व्यक्ति अपनी बेटी किसी पति को इस शर्त पर अर्पित करता था कि उसका पोता उसे गोद लेने और उसकी संपत्ति का उत्तराधिकारी बनने के लिए उसे वापस कर दिया जाए। इसे पुत्रिका-धर्म कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि धार्मिक अनुष्ठानों के निष्पादन से व्यक्ति को पुत्र प्राप्त होता है, यद्यपि व्यक्ति अपनी पत्नी से पुत्रहीन होता है। परंतु यहाँ हम मनु में असाधारण व्यवहार देखते हैं, क्योंकि दो पुत्र होने के बावजूद, उसने अपनी पहली बेटी प्रजापति रुचि को इस शर्त पर सौंप दिया कि उनकी बेटी से होने वाला पुत्र उन्हें उनके पुत्र के रूप में वापस कर दिया जाए। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर इस संबंध में टिप्पणी करते हैं कि राजा मनु जानते थे कि भगवान आकूति के गर्भ में जन्म लेंगे; इसलिए, दो पुत्र होने के बावजूद, वह आकूति से होने वाले विशेष पुत्र को चाहते थे क्योंकि उन्हें भगवान का अपने पुत्र और पोते के रूप में प्रकट होना चाहिए था। मनु मानव जाति के विधायक हैं, और चूंकि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पुत्रिका-धर्म का पालन किया, हम स्वीकार कर सकते हैं कि ऐसी प्रणाली भी मानव जाति द्वारा अपनाई जा सकती है। इस प्रकार, भले ही किसी के पास पुत्र हो, यदि वह अपनी बेटी से एक विशेष पुत्र चाहता है, तो वह उस शर्त पर अपनी बेटी को दान में दे सकता है। यह श्रील जीव गोस्वामी की राय है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥