श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 9: सृजन-शक्ति के लिए ब्रह्मा द्वारा स्तुति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.9.8 
क्षुत्तृट्‌त्रिधातुभिरिमा मुहुरर्द्यमाना:
शीतोष्णवातवरषैरितरेतराच्च ।
कामाग्निनाच्युत रुषा च सुदुर्भरेण
सम्पश्यतो मन उरुक्रम सीदते मे ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
हे महान अभिनेता, मेरे प्रभु, ये सभी निर्धन प्राणी निरन्तर भूख, प्यास, कफ व पित्त से दुखी हैं, इन पर कफ युक्त सर्दियाँ, भीषण गर्मी, वर्षा और कई अन्य चिड़चिड़े तत्व आक्रमण करते रहते हैं और ये प्रबल कामनाओं और दुःसह क्रोध से परेशान रहते हैं। मुझे इन पर दया आती है और मैं इनके लिए अत्यधिक दुःखी रहता हूँ।
 
हे महान अभिनेता, मेरे प्रभु, ये सभी निर्धन प्राणी निरन्तर भूख, प्यास, कफ व पित्त से दुखी हैं, इन पर कफ युक्त सर्दियाँ, भीषण गर्मी, वर्षा और कई अन्य चिड़चिड़े तत्व आक्रमण करते रहते हैं और ये प्रबल कामनाओं और दुःसह क्रोध से परेशान रहते हैं। मुझे इन पर दया आती है और मैं इनके लिए अत्यधिक दुःखी रहता हूँ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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