हे भगवान, जग के लोग भौतिक चिंताओं में घिरे हुए हैं और सदैव भय के साये में रहते हैं। वे धन, शरीर और मित्रों की रक्षा में लगे रहते हैं। वे दुख और अवैध इच्छाओं से भरे हुए हैं और "मेरा" और "मेरे" के क्षणभंगुर विचारों से प्रेरित होकर अपनी परियोजनाओं का आधार बनाते हैं। जब तक वे आपके सुरक्षित चरण कमलों का आश्रय नहीं लेते, तब तक वे ऐसी चिंताओं से भरे रहते हैं।
O Lord, the people of the world are troubled with all material anxieties—they are always afraid. They always try to protect wealth, body, and friends, they are filled with sorrow and illicit desires and paraphernalia, and out of greed they base their obstinacy on the transient notions of “I” and “mine.” They remain filled with such anxieties until they take refuge in Your protecting feet.
तात्पर्य
व्यक्ति प्रश्न कर सकता है कि यदि व्यक्ति पारिवारिक मामलों के विचारों से शर्मिंदा हो तो वह भगवान के नाम, यश, गुणवत्ता आदि के संबंध में हमेशा कैसे सोच सकता है। भौतिक दुनिया में हर कोई अपने परिवार के पालन-पोषण, अपनी संपत्ति की रक्षा, मित्रों और रिश्तेदारों के साथ तालमेल बनाए रखने आदि के बारे में विचारों से भरा रहता है। इस प्रकार वह हमेशा भय और विलाप में रहता है, यथास्थिति को बनाए रखने की कोशिश करता है। इस प्रश्न के उत्तर में, ब्रह्मा द्वारा बोला गया यह श्लोक अति उपयुक्त है। भगवान का एक शुद्ध भक्त कभी भी खुद को अपने घर का मालिक नहीं समझता। वह सब कुछ भगवान के सर्वोच्च नियंत्रण में समर्पित कर देता है, और इस तरह उसे अपने परिवार का भरण-पोषण करने या अपने परिवार के हितों की रक्षा करने के लिए कोई भय नहीं है। इस समर्पण के कारण, उसे अब धन के लिए कोई आकर्षण नहीं रहता। भले ही धन के लिए आकर्षण हो, लेकिन यह इंद्रियों के भोग के लिए नहीं, बल्कि भगवान की सेवा के लिए है। एक शुद्ध भक्त एक साधारण व्यक्ति की तरह धन संचय करने के लिए आकर्षित हो सकता है, लेकिन अंतर यह है कि एक भक्त भगवान की सेवा के लिए धन अर्जित करता है, जबकि एक साधारण व्यक्ति इंद्रियों के भोग के लिए धन अर्जित करता है। इस प्रकार एक भक्त द्वारा धन का अर्जन चिंताओं का स्रोत नहीं होता, जैसा कि एक सांसारिक व्यक्ति के लिए होता है। और क्योंकि एक शुद्ध भक्त भगवान की सेवा करने की भावना से सब कुछ स्वीकार करता है, धन के संचय के जहरीले दांत निकाले जाते हैं। यदि किसी सांप का जहर निकाल दिया गया है और वह किसी व्यक्ति को काटता है, तो उसका कोई घातक प्रभाव नहीं होता है। इसी तरह, भगवान की भक्ति के कारण संचित धन में कोई जहरीले दांत नहीं होते हैं, और उसका प्रभाव घातक नहीं होता है। एक शुद्ध भक्त भौतिक सांसारिक मामलों में कभी उलझता नहीं है, भले ही वह एक सामान्य व्यक्ति की तरह दुनिया में रहे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥