'पराय' शब्द बहुत महत्वपूर्ण है। परा भक्ति या ईश्वर का सहज प्रेम, प्रभु के साथ एक अंतरंग सम्बन्ध का आधार है। भगवान् के साथ सम्बन्ध के इस सर्वोच्च स्तर को भगवान् के नाम, रूप, गुण आदि के बारे में प्रामाणिक स्रोतों जैसे भगवद् गीता और श्रीमद् भागवत से सुनने से ही प्राप्त किया जा सकता है, जिसे भगवान् के शुद्ध, निष्कलंक भक्तों द्वारा सुनाया जाता है।
