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श्लोक 3.9.37  |
तुभ्यं मद्विचिकित्सायामात्मा मे दर्शितोऽबहि: ।
नालेन सलिले मूलं पुष्करस्य विचिन्वत: ॥ ३७ ॥ |
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| अनुवाद |
| जब तुम विचार कर रहे थे कि तुम्हारे जन्म रूपी कमल के डंठल का कोई स्रोत है या नहीं और उस डंठल के भीतर भी गए थे, तब तुम्हें कुछ पता नहीं चल पाया था। किंतु उस समय मैंने अंदर से अपना रूप प्रकट कर दिया था। |
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| जब तुम विचार कर रहे थे कि तुम्हारे जन्म रूपी कमल के डंठल का कोई स्रोत है या नहीं और उस डंठल के भीतर भी गए थे, तब तुम्हें कुछ पता नहीं चल पाया था। किंतु उस समय मैंने अंदर से अपना रूप प्रकट कर दिया था। |
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