जब तुम विचार कर रहे थे कि तुम्हारे जन्म रूपी कमल के डंठल का कोई स्रोत है या नहीं और उस डंठल के भीतर भी गए थे, तब तुम्हें कुछ पता नहीं चल पाया था। किंतु उस समय मैंने अंदर से अपना रूप प्रकट कर दिया था।
When you were thinking whether the stem of the lotus-stem of your birth had any source or not and you had even entered inside that stem, then you were unable to find out anything. But at that time I had revealed My form from within.
तात्पर्य
भगवान का व्यक्तित्व केवल उनकी अकारण दया से ही अनुभव किया जा सकता है, न कि मानसिक अनुमान से या भौतिक इंद्रियों की मदद से। भौतिक इंद्रियां भगवान के व्यक्तित्व की पारलौकिक समझ तक नहीं पहुंच सकती हैं। उनकी सराहना केवल समर्पित भक्ति सेवा से ही हो सकती है जब वह भक्त के सामने स्वयं को प्रकट करते हैं। केवल भगवान के प्रेम से ही कोई ईश्वर को जान सकता है, अन्यथा नहीं। भगवान के व्यक्तित्व को भौतिक आंखों से नहीं देखा जा सकता है, लेकिन उन्हें भगवान के प्रेम के मरहम से खोली गई आध्यात्मिक आंखों से भीतर से देखा जा सकता है। जब तक किसी की आध्यात्मिक आंखें पदार्थ के गंदे आवरण के कारण बंद हैं, तब तक वह भगवान को नहीं देख सकता है। लेकिन जब भक्ति सेवा की प्रक्रिया द्वारा गंदगी को हटा दिया जाता है, तो कोई निस्संदेह भगवान को देख सकता है। कमल के पाइप की जड़ को देखने के लिए ब्रह्मा का व्यक्तिगत प्रयास विफल रहा, लेकिन जब भगवान उनकी तपस्या और भक्ति से संतुष्ट हुए, तो उन्होंने बिना किसी बाहरी प्रयास के खुद को भीतर से प्रकट किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥