यद्यपि मैं सहज ही बद्ध आत्माओं के लिए ज्ञातव्य नहीं हूँ, किन्तु आज तुमने मुझे इसलिये जाना क्योंकि तुम जानते हो कि मेरा व्यक्तित्व किसी भी भौतिक वस्तु, विशेषकर पंच महाभूत और त्रिगुणात्मक तत्वों से बना नहीं है।
Although I am not easily knowable by a conditioned soul, today you have come to know Me, for you know that I am not composed of any material thing, particularly the five gross and three subtle elements.
तात्पर्य
पूर्ण परम सत्य के ज्ञान में भौतिक अभिव्यक्ति का निषेध करना आवश्यक नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक अस्तित्व को वैसे ही समझना है जैसा वह है। यह सोचना कि क्योंकि भौतिक अस्तित्व रूपों में महसूस किया जाता है इसलिए आध्यात्मिक अस्तित्व निराकार होना चाहिए, यह केवल आत्मा की एक नकारात्मक भौतिक अवधारणा है। वास्तविक आध्यात्मिक अवधारणा यह है कि आध्यात्मिक रूप भौतिक रूप नहीं है। ब्रह्मा ने प्रभु के शाश्वत रूप की इस तरह से प्रशंसा की, और भगवान ने ब्रह्मा की आध्यात्मिक अवधारणा को स्वीकार किया। भगवद-गीता में भगवान कृष्ण ने अपने शरीर की भौतिक अवधारणा की निंदा की, एक अवधारणा जो इसलिए उत्पन्न होती है क्योंकि वह स्पष्ट रूप से एक मनुष्य की तरह मौजूद है। प्रभु अपने कई, कई आध्यात्मिक रूपों में से किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं, लेकिन वह भौतिक रूप से संयोजित नहीं है, न ही उसके शरीर और स्वयं के बीच कोई अंतर है। प्रभु के आध्यात्मिक रूप की अवधारणा करने का यही तरीका है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥