जब से तुमने जनसंख्या को असंख्य रूपों में बढ़ाने तथा अपनी सेवा के प्रकारों को विस्तार देने की इच्छा जताई है, इस विषय से तुम कभी वंचित नहीं रहोगे क्योंकि मेरी निस्वार्थ कृपा हमेशा तुम्हारे लिये बढ़ती ही रहेगी।
Since you have expressed your desire to increase the population enormously and to expand the types of your services, you will never be deprived of this, for My causeless mercy upon you will always increase in all times.
तात्पर्य
भगवान के एक वास्तविक भक्त, विशेष समय, वस्तु और परिस्थिति के तथ्यों के ज्ञाता होने के कारण, हमेशा भगवान के भक्तों की संख्या को विभिन्न प्रकार से बढ़ाने की इच्छा रखता है। दिव्य सेवा के ऐसे विस्तार भौतिकवादी को भौतिक प्रतीत हो सकते हैं, लेकिन वास्तव में वे भक्त के प्रति भगवान की अकारण दया का विस्तार है। ऐसी गतिविधियों की योजनाएं भौतिक गतिविधियाँ प्रतीत हो सकती हैं, लेकिन क्षमता में भिन्न हैं, जो परम की दिव्य इंद्रियों की संतुष्टि में लगी हुई हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥