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श्लोक 3.9.32  |
यदा तु सर्वभूतेषु दारुष्वग्निमिव स्थितम् ।
प्रतिचक्षीत मां लोको जह्यात्तर्ह्येव कश्मलम् ॥ ३२ ॥ |
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| अनुवाद |
| तुम मुझे सारे जीवों और पूरे ब्रह्मांड में उसी प्रकार देख पाओगे, जैसे आग लकड़ी के अंदर रहती है। केवल उस दिव्य दृष्टि की अवस्था में ही तुम हर तरह के भ्रम से खुद को मुक्त कर पाओगे। |
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| तुम मुझे सारे जीवों और पूरे ब्रह्मांड में उसी प्रकार देख पाओगे, जैसे आग लकड़ी के अंदर रहती है। केवल उस दिव्य दृष्टि की अवस्था में ही तुम हर तरह के भ्रम से खुद को मुक्त कर पाओगे। |
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