श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 9: सृजन-शक्ति के लिए ब्रह्मा द्वारा स्तुति  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.9.30 
भूयस्त्वं तप आतिष्ठ विद्यां चैव मदाश्रयाम् ।
ताभ्यामन्तर्हृदि ब्रह्मन् लोकान्द्रक्ष्यस्यपावृतान् ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मा, तपस्या और ध्यान में रमकर ज्ञान के सिद्धांतों का पालन करो। इससे तुम अपने अंतर में सब कुछ समझ सकोगे और मेरी कृपा प्राप्त कर सकोगे।
 
हे ब्रह्मा, तपस्या और ध्यान में रमकर ज्ञान के सिद्धांतों का पालन करो। इससे तुम अपने अंतर में सब कुछ समझ सकोगे और मेरी कृपा प्राप्त कर सकोगे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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