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श्लोक 3.9.30  |
भूयस्त्वं तप आतिष्ठ विद्यां चैव मदाश्रयाम् ।
ताभ्यामन्तर्हृदि ब्रह्मन् लोकान्द्रक्ष्यस्यपावृतान् ॥ ३० ॥ |
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| अनुवाद |
| हे ब्रह्मा, तपस्या और ध्यान में रमकर ज्ञान के सिद्धांतों का पालन करो। इससे तुम अपने अंतर में सब कुछ समझ सकोगे और मेरी कृपा प्राप्त कर सकोगे। |
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| हे ब्रह्मा, तपस्या और ध्यान में रमकर ज्ञान के सिद्धांतों का पालन करो। इससे तुम अपने अंतर में सब कुछ समझ सकोगे और मेरी कृपा प्राप्त कर सकोगे। |
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