| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 3: यथास्थिति » अध्याय 9: सृजन-शक्ति के लिए ब्रह्मा द्वारा स्तुति » श्लोक 29 |
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| | | | श्लोक 3.9.29  | श्रीभगवानुवाच
मा वेदगर्भ गास्तन्द्रीं सर्ग उद्यममावह ।
तन्मयापादितं ह्यग्रे यन्मां प्रार्थयते भवान् ॥ २९ ॥ | | | | | | अनुवाद | | तब भगवान् ने कहा, "हे ब्रह्मा, हे वेदगर्भ, तुम सृष्टि के लिए न तो दुखी होओ और न ही चिंतित। तुम जो मुझसे माँग रहे हो, वह तुम्हें पहले ही दे दिया गया है।" | | | | तब भगवान् ने कहा, "हे ब्रह्मा, हे वेदगर्भ, तुम सृष्टि के लिए न तो दुखी होओ और न ही चिंतित। तुम जो मुझसे माँग रहे हो, वह तुम्हें पहले ही दे दिया गया है।" | | ✨ ai-generated | | |
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