भगवान ने देखा कि ब्रह्मा इस बात को लेकर अत्यंत चिंतित थे कि वे विभिन्न लोकों की योजना कैसे बनाएँगे और उनका निर्माण किस प्रकार करेंगे, तथा प्रलयकारी जल को देखकर बहुत दुखी थे। भगवान ने ब्रह्मा के मन की पीड़ा को समझ लिया अत: संसार के मोह को नष्ट कर देने वाले गंभीर और विचारशील शब्दों में कहा।
The Lord saw that Brahmā was deeply concerned about the planning and construction of the various worlds and was distressed at the sight of the raging waters. He understood Brahmā's feelings and, thus, dispelling the illusion that had arisen, spoke serious and thoughtful words.
तात्पर्य
विनाशकारी जल इतना भयावह था कि ब्रह्मा भी भयभीत हो गए और बाहरी अंतरिक्ष में मानव, मानव से निम्न और अलौकिक प्राणियों सहित विभिन्न प्रकार के जीवों को समायोजित करने हेतु विभिन्न ग्रह प्रणालियों को कैसे स्थित करें, इसको लेकर चिंतित हो गए। ब्रह्मांड में सभी ग्रह भौतिक प्रकृति के विभिन्न प्रकारों के प्रभाव में जीवों के विभिन्न ग्रेड के अनुसार स्थित हैं। भौतिक प्रकृति के तीन प्रकार होते हैं, और जब वे एक दूसरे के साथ मिश्रित होते हैं तो वे नौ हो जाते हैं। जब नौ मिश्रित होते हैं तो वे इक्यासी हो जाते हैं, और इक्यासी भी मिश्रित हो जाते हैं, और इस तरह हम अंततः यह नहीं जान पाते कि माया कैसे बढ़ती जाती है। भगवान ब्रह्मा को वातानुकूलित आत्माओं के अपेक्षित निकायों के लिए विभिन्न स्थानों और स्थितियों को समायोजित करना था। कार्य केवल ब्रह्मा के लिए था, और ब्रह्मांड में कोई भी यह नहीं समझ सकता था कि यह कितना कठिन था। लेकिन भगवान की कृपा से, ब्रह्मा इतना शानदार ढंग से भारी कार्य को निष्पादित करने में सक्षम थे कि हर कोई विधाता या नियामक की कारीगरी को देखकर चकित है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥