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श्लोक 3.9.23  |
एष प्रपन्नवरदो रमयात्मशक्त्या
यद्यत्करिष्यति गृहीतगुणावतार: ।
तस्मिन् स्वविक्रममिदं सृजतोऽपि चेतो
युञ्जीत कर्मशमलं च यथा विजह्याम् ॥ २३ ॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान सर्वशक्तिमान सदैव शरणागतों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। उनके सारे कार्य उनकी अंतरंग शक्ति रमा या लक्ष्मी के माध्यम से संपन्न होते हैं। मेरी उनसे यही विनती है कि भौतिक जगत के सृजन में वे मुझे अपनी सेवा में लगा लें और मेरी यही प्रार्थना है कि मैं अपने कर्मों से भौतिक रूप से प्रभावित न होऊँ, क्योंकि इस प्रकार मैं स्रष्टा होने की मिथ्या प्रतिष्ठा से मुक्त हो सकूँगा। |
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| भगवान सर्वशक्तिमान सदैव शरणागतों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। उनके सारे कार्य उनकी अंतरंग शक्ति रमा या लक्ष्मी के माध्यम से संपन्न होते हैं। मेरी उनसे यही विनती है कि भौतिक जगत के सृजन में वे मुझे अपनी सेवा में लगा लें और मेरी यही प्रार्थना है कि मैं अपने कर्मों से भौतिक रूप से प्रभावित न होऊँ, क्योंकि इस प्रकार मैं स्रष्टा होने की मिथ्या प्रतिष्ठा से मुक्त हो सकूँगा। |
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