एष प्रपन्नवरदो रमयात्मशक्त्या
यद्यत्करिष्यति गृहीतगुणावतार: ।
तस्मिन् स्वविक्रममिदं सृजतोऽपि चेतो
युञ्जीत कर्मशमलं च यथा विजह्याम् ॥ २३ ॥
अनुवाद
भगवान सर्वशक्तिमान सदैव शरणागतों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। उनके सारे कार्य उनकी अंतरंग शक्ति रमा या लक्ष्मी के माध्यम से संपन्न होते हैं। मेरी उनसे यही विनती है कि भौतिक जगत के सृजन में वे मुझे अपनी सेवा में लगा लें और मेरी यही प्रार्थना है कि मैं अपने कर्मों से भौतिक रूप से प्रभावित न होऊँ, क्योंकि इस प्रकार मैं स्रष्टा होने की मिथ्या प्रतिष्ठा से मुक्त हो सकूँगा।
The Lord is always the bestower of blessings on those who surrender. All His activities are accomplished through His internal energy, Rama or Lakshmi. I only ask Him to engage me in His service in the creation of the material world and I only pray that I may not be materially affected by my actions, for in this way I will be able to give up the false prestige of being a creator.
तात्पर्य
सृष्टि के निर्माण, रखरखाव और विनाश संबंधी विषय में तीनों गुणों के तीन अवतार हैं - ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर। परंतु, विष्णु के रूप में प्रभु का आंतरिक शक्ति में अवतार, सभी गतिविधियों के लिए सर्वोच्च ऊर्जा है। ब्रह्मा, जो सिर्फ़ सृजन के गुणों में सहयोगी हैं, वह अपने निर्माता के यंत्र के रूप में अपनी वास्तविक स्थिति में बने रहना चाहते थे, स्वयं को निर्माता समझकर, झूठे प्रतिष्ठा के कारण पागल बने बिना। सर्वोच्च प्रभु को प्रिय बनने का और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का यही तरीका था। मूर्ख व्यक्ति अपने द्वारा किए गए सभी सृजन का श्रेय लेना चाहते हैं, पर बुद्धिमान व्यक्ति भलीभाँति जानते हैं कि प्रभु की इच्छा के बिना घास का एक तिनका भी नहीं हिल सकता; अतः सभी अद्भुत सृजनों का श्रेय उन्हीं को जाना चाहिए। केवल आध्यात्मिक चेतना द्वारा ही व्यक्ति भौतिक मोह के संदूषण से मुक्त हो सकता है और प्रभु द्वारा दिए जाने वाले आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥