Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 3.8.20: हे विदुर, अपने अस्तित्व के बारे में इस तरह खोज करते हुए ब्रह्मा अपने अंत समय पर पहुँच गए, जो विष्णु के हाथ में शाश्वत चक्र है और जो जीव के मन में मृत्यु के भय के समान भय उत्पन्न करता है। | bhagavat अध्याय 3.8: गर्भोदकशायी विष्णु से ब्रह्मा का प्राकट्य । bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमस्यपारे विदुरात्मसर्गं
विचिन्वतोऽभूत्सुमहांस्त्रिणेमि: ।
यो देहभाजां भयमीरयाण:
परिक्षिणोत्यायुरजस्य हेति: ॥ २० ॥
अनुवाद
हे विदुर, अपने अस्तित्व के बारे में इस तरह खोज करते हुए ब्रह्मा अपने अंत समय पर पहुँच गए, जो विष्णु के हाथ में शाश्वत चक्र है और जो जीव के मन में मृत्यु के भय के समान भय उत्पन्न करता है।
O Vidura, while thus inquiring about his existence, Brahmā reached his zenith, which is the eternal wheel in the hands of Viṣṇu, and which creates in the mind of the living being the delusional fear of death.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥