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श्लोक 3.7.4  |
अस्राक्षीद्भगवान् विश्वं गुणमय्यात्ममायया ।
तया संस्थापयत्येतद्भूय: प्रत्यपिधास्यति ॥ ४ ॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान ने प्रकृति के तीनों गुणों की स्वसंचालित शक्ति द्वारा इस ब्रह्मांड का निर्माण करवाया। उसी शक्ति द्वारा वह सृष्टि का पालन करते हैं और फिर उसे बार-बार नष्ट भी करते हैं। |
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| भगवान ने प्रकृति के तीनों गुणों की स्वसंचालित शक्ति द्वारा इस ब्रह्मांड का निर्माण करवाया। उसी शक्ति द्वारा वह सृष्टि का पालन करते हैं और फिर उसे बार-बार नष्ट भी करते हैं। |
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