| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 3: यथास्थिति » अध्याय 7: विदुर द्वारा अन्य प्रश्न » श्लोक 29 |
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| | | | श्लोक 3.7.29  | वर्णाश्रमविभागांश्च रूपशीलस्वभावत: ।
ऋषीणां जन्मकर्माणि वेदस्य च विकर्षणम् ॥ २९ ॥ | | | | | | अनुवाद | | हे महर्षे, कृप्या मानव समाज के वर्णों एवं आश्रमों के विभाजन का वर्णन उनके लक्षणों, स्वभाव और मानसिक संतुलन तथा इंद्रिय संयम के अनुसार करें। कृप्या महर्षियों के जन्म और वेदों के कोटि-विभाजन का भी वर्णन करें। | | | | हे महर्षे, कृप्या मानव समाज के वर्णों एवं आश्रमों के विभाजन का वर्णन उनके लक्षणों, स्वभाव और मानसिक संतुलन तथा इंद्रिय संयम के अनुसार करें। कृप्या महर्षियों के जन्म और वेदों के कोटि-विभाजन का भी वर्णन करें। | | ✨ ai-generated | | |
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