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bhagavat 3.7.24: हे प्रभु, मेरे विचार में, पुत्र, पोते और परिवार के सदस्यों के रूप में प्रकट होने वाली शक्ति समस्त ब्रह्मांड में विभिन्न रूपों और प्रजातियों में फैल गई है।   |   bhagavat अध्याय 3.7: विदुर द्वारा अन्य प्रश्न   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 7: विदुर द्वारा अन्य प्रश्न  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.7.24 
यत्र पुत्रैश्च पौत्रैश्च नप्तृभि: सह गोत्रजै: ।
प्रजा विचित्राकृतय आसन् याभिरिदं ततम् ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु, मेरे विचार में, पुत्र, पोते और परिवार के सदस्यों के रूप में प्रकट होने वाली शक्ति समस्त ब्रह्मांड में विभिन्न रूपों और प्रजातियों में फैल गई है।
 
O Lord, in my view the power (force) manifested in the form of sons, grandsons and relatives is spread throughout the universe in various forms and species.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)