अतो भगवतो माया मायिनामपि मोहिनी ।
यत्स्वयं चात्मवर्त्मात्मा न वेद किमुतापरे ॥ ३९ ॥
अनुवाद
पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् की आश्चर्यकारक शक्ति तो जादूगरों को भी चकित कर देने वाली है। यह शक्ति तो आत्मराम भगवान् को भी अज्ञात है, तब अन्य लोग इसे कैसे जान सकते हैं?
The amazing power of the Supreme Personality of Godhead is enough to baffle even magicians. This inherent power is unknown even to Atmaram Bhagavan, so it is certainly unknown to others.
तात्पर्य
विज्ञान तथा गणितीय गणन में मेंढक-दार्शनिक एवं सांसारिक तर्क-वितर्ककर्ता सर्वोच्च भगवान के अतर्कनीय सामर्थ्य पर विश्वास नहीं करते, किन्तु वे कभी-कभी मनुष्य तथा प्रकृति के चमत्कारिक खेल से उलझन में पड़ जाते हैं। संसारिक क्षेत्र के ऐसे छद्मविद्वान और जादूगर वास्तव में भगवान की पारलौकिक गतिविधियों में उनकी छद्मविद्या से उलझन में पड़ जाते हैं, परन्तु वे अपनी उलझन को यह कहकर छिपाने का प्रयास करते हैं कि यह सब पौराणिक है। सर्वोच्च सर्वशक्तिमान पुरुष में कुछ भी असंभव या पौराणिक नहीं है। सांसारिक तर्क-वितर्ककर्ताओं के लिए सबसे बड़ी पहेली यह है कि जब वे सर्वोच्च पुरुष की असीम शक्ति की लंबाई और चौड़ाई की गणना में लगे रहते हैं, भगवान के विश्वासी भक्त व्यावहारिक क्षेत्र में सर्वोच्च के चमत्कारिक खेल की सराहना करके भौतिक पिंजरे के बंधन से मुक्त हो जाते हैं। भगवान के भक्त हर उस चीज में आश्चर्यजनक निपुणता देखते हैं जिसके साथ वे भोजन, नींद, कार्य, आदि सभी परिस्थितियों में संपर्क करते हैं। एक छोटे से बरगद के फल में हजारों छोटे बीज होते हैं, और प्रत्येक बीज में एक अन्य पेड़ की शक्ति होती है, जिसमें फिर से लाखों ऐसे फलों की शक्ति होती है जो कारण और प्रभाव होते हैं। अतः वृक्ष और बीज भक्तों को प्रभु की गतिविधियों के बारे में ध्यान करने में संलग्न करते हैं, जबकि सांसारिक तर्ककर्ता सूखी अटकलों और मानसिक रचना में समय बरबाद करते हैं, जो इस जन्म और अगले दोनों में निष्फल होते हैं। अटकलों में अपने अभिमान के बावजूद, वे कभी भी बरगद के पेड़ की शक्ति की सरल गतिविधियों की सराहना नहीं कर सकते। ऐसे सट्टेबाज गरीब灵魂 हैं जो सदा के लिए पदार्थ में बने रहने को नियत हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥