| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 3: यथास्थिति » अध्याय 6: विश्व रूप की सृष्टि » श्लोक 39 |
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| | | | श्लोक 3.6.39  | अतो भगवतो माया मायिनामपि मोहिनी ।
यत्स्वयं चात्मवर्त्मात्मा न वेद किमुतापरे ॥ ३९ ॥ | | | | | | अनुवाद | | पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् की आश्चर्यकारक शक्ति तो जादूगरों को भी चकित कर देने वाली है। यह शक्ति तो आत्मराम भगवान् को भी अज्ञात है, तब अन्य लोग इसे कैसे जान सकते हैं? | | | | पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् की आश्चर्यकारक शक्ति तो जादूगरों को भी चकित कर देने वाली है। यह शक्ति तो आत्मराम भगवान् को भी अज्ञात है, तब अन्य लोग इसे कैसे जान सकते हैं? | | ✨ ai-generated | | |
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