Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 3.6.27: इसके पश्चात, उस विशाल रूप के सिर से स्वर्ग के ग्रह प्रकट हुए, उसके पैरों से पृथ्वी के ग्रह और उसके मध्यभाग से आकाश अलग-अलग प्रकट हुआ। इनके भीतर देवता और अन्य भी भौतिक प्रकृति के गुणों के रूप में प्रकट हुए। | bhagavat अध्याय 3.6: विश्व रूप की सृष्टि । bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसके पश्चात, उस विशाल रूप के सिर से स्वर्ग के ग्रह प्रकट हुए, उसके पैरों से पृथ्वी के ग्रह और उसके मध्यभाग से आकाश अलग-अलग प्रकट हुआ। इनके भीतर देवता और अन्य भी भौतिक प्रकृति के गुणों के रूप में प्रकट हुए।
After that, the heaven appeared from the head of the Virat form, the earth appeared from his feet and the sky appeared separately from his navel. Within these, gods etc. also appeared in the form of three qualities of material nature.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥