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bhagavat 3.6.23: जब विशाल रूप की बुद्धि पृथक रूप से प्रकट हुई, तो वेदों के स्वामी ब्रह्मा उसमें समझ की आंशिक शक्ति के साथ प्रवेश कर गए, और इस प्रकार जीवों द्वारा बुद्धि के उद्देश्य का अनुभव किया जाता है।   |   bhagavat अध्याय 3.6: विश्व रूप की सृष्टि   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 6: विश्व रूप की सृष्टि  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.6.23 
बुद्धिं चास्य विनिर्भिन्नां वागीशो धिष्ण्यमाविशत् ।
बोधेनांशेन बोद्धव्यम् प्रतिपत्तिर्यतो भवेत् ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
जब विशाल रूप की बुद्धि पृथक रूप से प्रकट हुई, तो वेदों के स्वामी ब्रह्मा उसमें समझ की आंशिक शक्ति के साथ प्रवेश कर गए, और इस प्रकार जीवों द्वारा बुद्धि के उद्देश्य का अनुभव किया जाता है।
 
When the intelligence of the Virata form appeared separately, Brahma, the Lord of the Vedas, entered into it with partial power of the intelligence and in this way the purpose of the intelligence is experienced by the living beings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)