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श्लोक 3.6.21  |
हस्तावस्य विनिर्भिन्नाविन्द्र: स्वर्पतिराविशत् ।
वार्तयांशेन पुरुषो यया वृत्तिं प्रपद्यते ॥ २१ ॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात जब विराट रूप के हाथ अलग-अलग प्रकट हुए, तो स्वर्गलोक के शासक इन्द्र उन हाथों में प्रवेश कर गए और इस प्रकार जीविका चलाने हेतु जीव व्यापार करने में समर्थ हुआ। |
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| तत्पश्चात जब विराट रूप के हाथ अलग-अलग प्रकट हुए, तो स्वर्गलोक के शासक इन्द्र उन हाथों में प्रवेश कर गए और इस प्रकार जीविका चलाने हेतु जीव व्यापार करने में समर्थ हुआ। |
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