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श्लोक 3.6.12  |
तस्याग्निरास्यं निर्भिन्नं लोकपालोऽविशत्पदम् ।
वाचा स्वांशेन वक्तव्यं ययासौ प्रतिपद्यते ॥ १२ ॥ |
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| अनुवाद |
| उनके मुख अथवा ऊर्जा से उत्पन्न ऊष्मा से भौतिक कार्यों के प्रबंधक अलग हो गए और उसके बाद अपने-अपने पदों के अनुसार उनमें प्रवेश कर गए। जीव उसी ऊर्जा से शब्दों के द्वारा अपने को व्यक्त करता है। |
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| उनके मुख अथवा ऊर्जा से उत्पन्न ऊष्मा से भौतिक कार्यों के प्रबंधक अलग हो गए और उसके बाद अपने-अपने पदों के अनुसार उनमें प्रवेश कर गए। जीव उसी ऊर्जा से शब्दों के द्वारा अपने को व्यक्त करता है। |
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