श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 6: विश्व रूप की सृष्टि  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.6.11 
अथ तस्याभितप्तस्य कतिधायतनानि ह ।
निरभिद्यन्त देवानां तानि मे गदत: श‍ृणु ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
मैत्रेय ने कहा: अब तुम मुझसे सुनो कि किस प्रकार भगवान ने अपने असीम विशाल रूप को प्रकट करने के बाद स्वयं को देवताओं के विभिन्न रूपों में विभाजित किया।
 
मैत्रेय ने कहा: अब तुम मुझसे सुनो कि किस प्रकार भगवान ने अपने असीम विशाल रूप को प्रकट करने के बाद स्वयं को देवताओं के विभिन्न रूपों में विभाजित किया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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