श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 6: विश्व रूप की सृष्टि  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.6.10 
स्मरन् विश्वसृजामीशो विज्ञापितमधोक्षज: ।
विराजमतपत्स्वेन तेजसैषां विवृत्तये ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
परम प्रभु उन सभी देवताओं के परमात्मा हैं, जिन्हें विराट जगत की रचना का कार्यभार सौंपा गया है। (देवताओं द्वारा) इस प्रकार प्रार्थना किये जाने पर उन्होंने अपने मन में विचार किया और तब उनको समझाने के लिए अपना विराट रूप प्रकट किया।
 
परम प्रभु उन सभी देवताओं के परमात्मा हैं, जिन्हें विराट जगत की रचना का कार्यभार सौंपा गया है। (देवताओं द्वारा) इस प्रकार प्रार्थना किये जाने पर उन्होंने अपने मन में विचार किया और तब उनको समझाने के लिए अपना विराट रूप प्रकट किया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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