हे ब्राह्मणश्रेष्ठ, अब यह भी विस्तारपूर्वक बताएँ कि ब्रह्माण्ड के रचयिता और आत्मनिर्भर प्रभु नारायण ने विभिन्न प्राणियों के स्वभाव, कार्य, रूप, विशेषताओं और नामों का निर्माण किस प्रकार पृथक-पृथक ढंग से किया है।
O best of Brahmins, please also tell me how the Lord Narayana, the creator of the universe and self-sufficient, has created the natures, functions, forms, characteristics and names of the various living beings separately.
तात्पर्य
हर जीव अपने स्वभाव के अनुसार भौतिक प्रकृति के गुणों की योजना के अधीन है। उसका काम तीनों गुणों की प्रकृति के अनुसार प्रकट होता है, उसका रूप और शारीरिक विशेषताएँ उसके काम के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं, और उसका नाम उसके शारीरिक विशेषताओं के अनुसार निर्दिष्ट किया जाता है। उदाहरण के लिए, पुरुषों के उच्च वर्ग श्वेत (शुक्ल) होते हैं, और पुरुषों के निचले वर्ग काले होते हैं। श्वेत और काले का यह विभाजन जीवन के अपने श्वेत और काले कर्तव्यों के अनुसार है। पवित्र कर्म किसी को एक अच्छे और उच्च कुल में जन्म लेने, धनी बनने, विद्वान बनने और सुंदर शारीरिक विशेषताएँ प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। अधर्मी कार्य किसी को माता-पिता से गरीब बनने, हमेशा अभाव में रहने, मूर्ख या अनपढ़ बनने और कुरूप शारीरिक विशेषताएँ प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। विदुर ने मैत्रेय से नारायण, ईश्वर के सर्वोच्च व्यक्तित्व द्वारा बनाए गए सभी जीवित प्राणियों के बीच इन अंतरों को समझाने का अनुरोध किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥