हे प्रभु, आप सृष्टि, पालन और सृष्टि के विनाश के लिए अवतार लेते हैं; इसलिए हम सभी आपके चरण कमलों की शरण में आते हैं, क्योंकि ये आपके भक्तों को हमेशा स्मृति और साहस प्रदान करने वाले हैं।
O Lord, You incarnate to create, preserve and destroy the vast universe, therefore we all take refuge in Your lotus feet, as these feet always provide memory and courage to Your devotees.
तात्पर्य
कॉस्मिक अभिव्यक्तियों के निर्माण, रख-रखाव और विघटन के लिए तीन अवतार हैं: ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर (भगवान शिव) | वे भौतिक प्रकृति के तीनों मोड के नियंत्रक या स्वामी हैं, जो अभूतपूर्व अभिव्यक्ति का कारण बनते हैं | विष्णु भलाई के गुण के स्वामी हैं, ब्रह्मा जोश के गुण के स्वामी हैं और महेश्वर अज्ञान के गुण के स्वामी हैं | प्रकृति के तरीकों के अनुसार अलग-अलग प्रकार के भक्त होते हैं | अच्छाई के तरीकों वाले व्यक्ति भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, जोश के तरीके वाले भगवान ब्रह्मा की पूजा करते हैं और अज्ञान के तरीके वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं | ये तीनों देवता सर्वोच्च भगवान कृष्ण के अवतार हैं क्योंकि वे स्वयं सर्वोच्च भगवान है | अर्ध देवता सीधे सर्वोच्च भगवान के कमल के पैरों का उल्लेख करते हैं और अलग-अलग अवतारों का नहीं | भौतिक दुनिया में विष्णु के अवतार की हालांकि, अर्ध देवताओं द्वारा सीधे पूजा की जाती है | विभिन्न शास्त्रों से यह पता चला है कि जब सार्वभौमिक मामलों के प्रशासन में कुछ कठिनाई होती है तो अर्ध देवता दूध के महासागर में भगवान विष्णु के पास जाते हैं और अपनी शिकायतें जमा करते हैं | यद्यपि वे भगवान के अवतार हैं, भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और इस प्रकार वे भी अर्ध देवताओं में गिने जाते हैं और सर्वोच्च भगवान के रूप में नहीं | जो व्यक्ति भगवान विष्णु की पूजा करते हैं उन्हें अर्ध देवता कहा जाता है और जो व्यक्ति ऐसा नहीं करते हैं उन्हें असुर या राक्षस कहा जाता है | विष्णु हमेशा अर्ध देवताओं का पक्ष लेते हैं, लेकिन ब्रह्मा और शिव कभी-कभी राक्षसों का पक्ष लेते हैं; ऐसा नहीं है कि वे उनके साथ रुचि में एक हो जाते हैं, लेकिन कभी-कभी वे राक्षसों पर नियंत्रण पाने के लिए कुछ करते हैं |
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥