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bhagavat 3.5.37: हे भव्य व्यक्ति, आकाश से लेकर पृथ्वी तक समस्त भौतिक तत्वों में पाए जाने वाला प्रत्येक श्रेष्ठ और निम्न गुण ईश्वर की दृष्टि के अंतिम स्पर्श के कारण ही होता है।   |   bhagavat अध्याय 3.5: मैत्रेय से विदुर की वार्ता   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 5: मैत्रेय से विदुर की वार्ता  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.5.37 
भूतानां नभ आदीनां यद्यद्भव्यावरावरम् ।
तेषां परानुसंसर्गाद्यथासंख्यं गुणान् विदु: ॥ ३७ ॥
 
 
अनुवाद
हे भव्य व्यक्ति, आकाश से लेकर पृथ्वी तक समस्त भौतिक तत्वों में पाए जाने वाला प्रत्येक श्रेष्ठ और निम्न गुण ईश्वर की दृष्टि के अंतिम स्पर्श के कारण ही होता है।
 
O noble one, all the inferior and superior qualities found in all the material elements from sky to earth are due to the last touch of the Lord's glance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)