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bhagavat 3.5.35: जब वायुमंडल में बिजली चमकने लगी और ईश्वर ने उस पर ध्यान दिया, तभी अनंत समय और बाहरी ऊर्जा के मेल से पानी और स्वाद का सृजन हुआ।   |   bhagavat अध्याय 3.5: मैत्रेय से विदुर की वार्ता   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 5: मैत्रेय से विदुर की वार्ता  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.5.35 
अनिलेनान्वितं ज्योतिर्विकुर्वत्परवीक्षितम् ।
आधत्ताम्भो रसमयं कालमायांशयोगत: ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
जब वायुमंडल में बिजली चमकने लगी और ईश्वर ने उस पर ध्यान दिया, तभी अनंत समय और बाहरी ऊर्जा के मेल से पानी और स्वाद का सृजन हुआ।
 
When electricity reacted in the air and Brahma looked at it, then water and taste were produced from the mixture of eternal and external energy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)