मिथ्या अहंकार के चंगुल से मुक्ति का सबसे अच्छा उपाय परम सत्य के बारे में दार्शनिक अटकल लगाने की आदत छोड़ना है। व्यक्ति को निश्चित रूप से पता होना चाहिए कि परम सत्य अपूर्ण अहंकारी व्यक्ति की दार्शनिक अटकलों से कभी भी प्राप्त नहीं होता है। परम सत्य या परमेश्वर व्यक्तित्व का एहसास उनके बारे में पूर्ण समर्पण और प्रेम से सुनने से होता है, एक प्रामाणिक अधिकारी से, जो श्रीमद भागवतम में वर्णित बारह महान अधिकारियों का प्रतिनिधि है। केवल ऐसे प्रयास से कोई प्रभु की भ्रामक ऊर्जा को जीत सकता है, यद्यपि दूसरों के लिए वह अपराजेय है, जैसा कि भगवद-गीता (7.14) में पुष्टि की गई है।
