अहंतत्त्वाद्विकुर्वाणान्मनो वैकारिकादभूत् ।
वैकारिकाश्च ये देवा अर्थाभिव्यञ्जनं यत: ॥ ३० ॥
अनुवाद
मिथ्या अहंकार सतोगुण से पारस्परिक क्रिया करके मन के रूप में बदल जाता है। सभी देवता जो इस भौतिकलोक पर शासन करते हैं, वे भी इसी सिद्धांत, यानि कि मिथ्या अहंकार और सतोगुण की पारस्परिक क्रिया के परिणाम हैं।
The false ego interacts with the mode of goodness and is transformed into the mind. All the gods who control the eventful world are also the result of the interaction between the same principle (tattva), that is, the false ego and the mode of goodness.
तात्पर्य
विभिन्न प्रकार के भौतिक प्रकृति के साथ अहंकार का संपर्क, भौतिक संसार में सभी सामग्रियों का स्रोत है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥