श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 5: मैत्रेय से विदुर की वार्ता  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.5.26 
कालवृत्त्या तु मायायां गुणमय्यामधोक्षज: ।
पुरुषेणात्मभूतेन वीर्यमाधत्त वीर्यवान् ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
अपने पूर्ण विस्तार, दिव्य पुरुष अवतार के रूप में परमेश्वर, तीनों गुणों वाली भौतिक प्रकृति (प्रकृति) में बीज बोते हैं, और इस तरह अनंत काल के प्रभाव से जीव प्रकट होते हैं।
 
अपने पूर्ण विस्तार, दिव्य पुरुष अवतार के रूप में परमेश्वर, तीनों गुणों वाली भौतिक प्रकृति (प्रकृति) में बीज बोते हैं, और इस तरह अनंत काल के प्रभाव से जीव प्रकट होते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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